पाप का मजा या मजेदार पाप

पाप मजेदार ही होता है। अगर एक व्यक्ति किसी के साथ व्यभिचार करेगा तो उसे आनंद की प्राप्ति होगी और वह अच्छा ही महसूस करेगा। मै यह बात पूरी गंभीरता के साथ कह रहा हूँ कि एक व्यक्ति को मै समझा रहा था कि व्यभिचार बुरी बात है और पाप है। उस व्यक्ति ने हँसते हुए मेरी बात को काटा और कहा कि व्यभिचार करने से दोनों व्यभिचारियों को आनंद की प्राप्ति होती है और सुकून मिलता है इसलिए यह पुण्य है पाप नहीं। उसने इस आधार पर व्यभिचार के पाप को वैध ठहराया कि इससे आनंद की प्राप्ति होती है। आपको एक और उदाहरण देता हूँ। पियक्कड़ होना पाप है लेकिन जो एक बोतल शराब पीकर पागलपन का आनंद लेता है, उसे सिर्फ मजा ही आता है। लोग यह मानते है कि जिससे अच्छा महसूस होता है वह पाप नहीं, और जिससे अच्छा महसूस नहीं होता वह पाप है, नहीं तो गलत तो पक्का है। इस माइंडसेट के साथ लोग जीते है। एक और उदाहरण वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देख लीजिये। एक ही पति की पत्नी बनकर एक ही पति को तन मन से चाहना उतना मजेदार नहीं जितना अपने नाना प्रकार के साथ उनकी मोटर साइकिलों पर बैठकर पिकनिक मनाने में है। दूसरे शब्दों में कहें तो अपने परिवार की देखभाल करना और खुद को घरेलु कामों में खपाने वाला काम उतना मजेदार नहीं महसूस होगा जितना अपने प्रेमियों के साथ सिनेमाघरों में जाकर फिल्म का मजा लेने में है। किसी को झूठ बोलकर धोखा देने में जितना मजा है उतना मजा सच बोलकर दुःख उठाने में कहाँ होगा। पवित्र वचन में जो पहला पाप या मानव के पाप में गिरने का जो मूल कारण है वह आँखों के मजे से व जीभ के आनंद से जुड़ा है। मनमोहक या आनंददायक आँखों को भाने वाला लुभावना पाप ही मानव और परमेश्वर के बीच दीवार बना। जीभ से मजा लेने की रुचि या चाहत पाप में गिरने की मूल वजह बनी।
मैंने यह अनुभव किया है कि मेरी पाप से दुश्मनी या पाप के ऊपर गुस्से के कारण कुछ लोगों से मेरे रिश्ते खराब हो गए है क्योंकि उन्हें बहुत बुरा लगा या दुःख लगा कि मैंने उन्हें पाप का मजा लेने से रोकने की कोशिश की। मैंने चाहा कि उनके शरीर के अंग एवं मन पाप का मजा न लें और परमेश्वर की भली इच्छा को पूरा करे। वो लोग अपने साथी से ही बेहद प्यार करे। अपने परिवार के साथ मिलकर एक मजबूत पारिवारिक रिश्ते के साथ प्रभु की महिमा करें। मेरी यह चाहत बहुतों के लिए गुस्से या पीड़ा का कारण बनी क्योंकि पाप बड़ा आकर्षक और मजेदार होता है। मुझे अफ़सोस उस वक्त होता है जब उन्हीं लोगो को बाद में तड़पते हुए देखता हूँ।

Published by

Hasti

A student and teacher of religions and philosophies. A follower of Lord Jesus Christ

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