क्रिसमस का अद्भुत संदेश

क्रिसमस सब त्यौहारों से अलग अद्भुत पर्व है। इस बड़े दिन से संबंधित कई आश्चर्यजनक कहानियां प्रचलन में हैं। सबसे ज्यादा प्रचलित कहानी है -“तीन ज्योतिषियों (ज्ञानियों) की कहानी।” इस कहानी को सही तरीके से पढ़ने और समझने पर कई तरह के रहस्य समझ में आते हैं। यह तीन ज्ञानी परमेश्वर से सही संदेश को पाते हैं लेकिन पूरी तरह से सही तरीके से नहीं समझ पाते। इनकी अधूरी समझ के कारण बहुत ही भयानक नुकसान हुआ। त्राहि त्राहि मच गई। यह लोग परमेश्वर के संदेश को सही तरीके से नहीं समझे और अपनी सांसारिक अनुभवी बुद्धि का इस्तेमाल करके कई लोगों के विनाश का कारण बने। आज भी बहुत से लोग हैं जो क्रिसमस के असली संदेश को नहीं समझ पाते और अपने तथा दूसरों के बहुत से नुकसान करते हैं। कई नुकसान विनाशकारी हैं।

बाइबल में तीन ज्ञानियों की कहानी इस तरह से प्रचलन में हैं-

“हेरोदेस राजा के दिनों में जब यहूदिया के बैतलहम में यीशु का जन्म हुआ, तो देखो, पूर्व से कई ज्योतिषी यरूशलेम में आकर पूछने लगे। कि यहूदियों का राजा जिस का जन्म हुआ है, कहां है? क्योंकि हम ने पूर्व में उसका तारा देखा है और उस को प्रणाम करने आए हैं। यह सुनकर हेरोदेस राजा और उसके साथ सारा यरूशलेम घबरा गया। और उस ने लोगों के सब महायाजकों और शास्त्रियों को इकट्ठे करके उन से पूछा, कि मसीह का जन्म कहाँ होना चाहिए? उन्होंने उस से कहा, यहूदिया के बैतलहम में; क्योंकि भविष्यद्वक्ता के द्वारा यों लिखा है, कि हे बैतलहम, जो यहूदा के देश में है, तू किसी रीति से यहूदा के अधिकारियों में सब से छोटा नहीं; क्योंकि तुझ में से एक अधिपति निकलेगा, जो मेरी प्रजा इस्राएल की रखवाली करेगा। तब हेरोदेस ने ज्योतिषियों को चुपके से बुलाकर उन से पूछा, कि तारा ठीक किस समय दिखाई दिया था। और उस ने यह कहकर उन्हें बैतलहम भेजा, कि जाकर उस बालक के विषय में ठीक ठीक मालूम करो और जब वह मिल जाए तो मुझे समाचार दो ताकि मैं भी आकर उस को प्रणाम करूं। वे राजा की बात सुनकर चले गए, और देखो, जो तारा उन्होंने पूर्व में देखा था, वह उन के आगे आगे चला, और जंहा बालक था, उस जगह के ऊपर पंहुचकर ठहर गया. उस तारे को देखकर वे अति आनन्दित हुए। और उस घर में पहुंचकर उस बालक को उस की माता मरियम के साथ देखा, और मुंह के बल गिरकर उसे प्रणाम किया; और अपना अपना थैला खोलकर उसे सोना, और लोहबान, और गन्धरस की भेंट चढ़ाई। और स्वप्न में यह चितौनी पाकर कि हेरोदेस के पास फिर न जाना, वे दूसरे मार्ग से होकर अपने देश को चले गए” (संत मत्ती 2:1-12 http://www.bible2all.com).

यह ज्ञानी बुद्धिमान तो थे और परमेश्वर द्वारा दिखाए गए चिन्हों को समझते थे मगर राजा की चालाकी को नहीं समझ पाए। वह तो बच्चे येशु मसीह की हत्या करना चाहता था। वह लोग राजा की इस राजनीति को नहीं समझ पाए। यह भी है कि वह अपने अनुभव और सांसारिक ज्ञान के कारण प्रभू ईसा मसीह को गलत जगह पर ढूंढ रहे थे। उनके अनुभव से ही उन्होंने यह धोखा खाया कि राजा तो राजमहल में ही जन्मा होगा। यहां इन्होंने परमेश्वर के प्रकाशन का इंतजार न करके अपनी बुद्धि का प्रयोग किया। अगर हम भी परमेश्वर के प्रकाशन पर निर्भर नहीं होते और मनमाने तरीके से क्रिसमस मनाते हैं तो हम मना तो लेंगे लेकिन वह सही अर्थों में क्रिसमस मनाना नहीं कहलाएगा।

हमने उपरोक्त कहानी में यह भी पढ़ा कि दूसरी तरफ ऐसे धर्मगुरु भी थे जिनको परमेश्वर के वचन का ज्ञान था। इसीलिए उन्होंने बता दिया कि प्रभु यीशु मसीह का अवतार कहां होना चाहिए। ताज्जुब कि बात है कि इन्हे भी नहीं मालूम कि प्रभु का जन्म हो चुका है। इस वर्ग की भी समस्या यह थी कि इन्हे परमेश्वर का प्रकाशन नहीं था। इन्हें परमेश्वर के वचन का ज्ञान था लेकिन परमेश्वर से व्यक्तिगत संबंध नहीं था।

हमने देखा कि एक वर्ग परमेश्वर द्वारा दिखाए गए चिन्हों को तो को तो समझ पाया था और जान लिया था कि प्रभु का जन्म हो चुका है लेकिन यह नहीं समझ पाया कि प्रभु कहां जन्मे हैं। दूसरा वर्ग यह जानता था कि प्रभु का जन्म कौनसे स्थान में होना चाहिए कि लेकिन यह नहीं समझ पाया कि प्रभु का जन्म हो चुका है।

इन दोनों वर्गों की सूचनाओं के आधार पर ही राजा हेरोदेस ने खून की होली खेली, जो आगे की कहानी में वर्णित है-

“जब हेरोदेस ने यह देखा, कि ज्योतिषियों ने मेरे साथ ठट्ठा किया है, तब वह क्रोध से भर गया; और लोगों को भेजकर ज्योतिषियों से ठीक ठीक पूछे हुए समय के अनुसार बैतलहम और उसके आस पास के सब लड़कों को जो दो वर्ष के, या उस से छोटे थे, मरवा डाला। तब जो वचन यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था, वह पूरा हुआ, कि रामाह में एक करूण-नाद सुनाई दिया, रोना और बड़ा विलाप, राहेल अपने बालकों के लिये रो रही थी, और शान्त होना न चाहती थी, क्योंकि वे हैं नहीं॥ हेरोदेस के मरने के बाद देखो, प्रभु के दूत ने मिस्र में यूसुफ को स्वप्न में दिखाई देकर कहा कि उठ, बालक और उस की माता को लेकर इस्राएल के देश में चला जा; क्योंकिं जो बालक के प्राण लेना चाहते थे, वे मर गए” (संत मत्ती 2:16-20 http://www.bible2all.com).

इस प्रकार हम देखते हैं कि इन दोनों वर्गों की कमजोरी के कारण इतनी जानें गईं। प्रभु से हमारी यह प्रार्थना हो कि हम हमारे अनुभव या ज्ञान पर निर्भर न होकर, परमेश्वर के प्रकाशन पर निर्भर हों, ताकि हम सही अर्थों में क्रिसमस मना पाऐं‌।

तीसरा वर्ग ऐसा था जो इन दोनों से हर बात में कमतर था। उनके पास इतना ज्ञान तथा बुद्धि नहीं थी। उनकी एक ही खासियत थी कि उनको परमेश्वर का स्पष्ट प्रकाशन मिला था। यह रोचक कहानी इस प्रकार है-

“और उस देश में कितने गड़ेरिये थे, जो रात को मैदान में रहकर अपने झुण्ड का पहरा देते थे। और प्रभु का एक दूत उन के पास आ खड़ा हुआ; और प्रभु का तेज उन के चारों ओर चमका, और वे बहुत डर गए। तब स्वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा। कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है। और इस का तुम्हारे लिये यह पता है, कि तुम एक बालक को कपड़े में लिपटा हुआ और चरनी में पड़ा पाओगे। तब एकाएक उस स्वर्गदूत के साथ स्वर्गदूतों का दल परमेश्वर की स्तुति करते हुए और यह कहते दिखाई दिया। कि आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है शान्ति हो॥ जब स्वर्गदूत उन के पास से स्वर्ग को चले गए, तो गड़ेरियों ने आपस में कहा, आओ, हम बैतलहम जाकर यह बात जो हुई है, और जिसे प्रभु ने हमें बताया है, देखें। और उन्होंने तुरन्त जाकर मरियम और यूसुफ को और चरनी में उस बालक को पड़ा देखा। इन्हें देखकर उन्होंने वह बात जो इस बालक के विषय में उन से कही गई थी, प्रगट की। और सब सुनने वालों ने उन बातों से जो गड़िरयों ने उन से कहीं आश्चर्य किया। परन्तु मरियम ये सब बातें अपने मन में रखकर सोचती रही। और गड़ेरिये जैसा उन से कहा गया था, वैसा ही सब सुनकर और देखकर परमेश्वर की महिमा और स्तुति करते हुए लौट गए” (संत लूका 2:8-20 http://www.bible2all.com).

हम भी यह उम्मीद रखें और प्रार्थना करें कि पवित्र प्रभु हमारी मन की आंखों को ज्योतिर्मय करें ताकि हमको समझ में आए कि असली क्रिसमस क्या हैं और इस दिन को जन्म लेने वाले प्रभु का हमारे जीवन से क्या संबंध है।

आप सबको क्रिसमस की शुभकामनाएं।

मसीही शायरी- “मसीहा की मुहब्बत”

गुनाहों के अँधेरे की भी क्या बात थी
पर मसीहा के सामने क्या बिसात थी
मेरी ज़िंदगी तो थी वीरान वीरान सी
दिल में काले गम की अँधेरी रात थी
बस घेरे थे निराशाओं के बादल मुझे
यूँ हर तरफ बस दर्द की सौगात थी

मैंने ढूँढा ना उसको, वो ही खुद आया
ये उसकी रहमत और निराली बात थी
मैं अपनी ताकत से ढूंढ लूं क्या उसको
मुझ नाचीज की ये कहाँ से औकात थी

मसीहा मिले तो महसूस हुआ मुझे भी
जैसे हर ओर खुशियों की बरसात थी
मिट चुका था मेरा अकेलापन भी पूरा
अपनाने को विश्वासियों की जमात थी

उठते हैं हाथ उसकी इबादत में ही
वरना इन हाथों में तो खुराफात थी
बदलता है बस मसीहा का करिश्मा
वरना यूँ किसमें इतनी करामात थी