शरीर के काम: कौन से काम है अशुद्ध?

“अब मांस (शरीर) के कार्य स्पष्ट हैं, जो हैं: व्यभिचार, हवस, अशुद्धता, अश्लीलता” (गलातियों के नाम संत पौलुस का पत्र 5:19).

इन शब्दों को या इस पंक्ति को जब हम पढ़ते है तो सबसे पहली गौर करने वाली बात है कि यहां जो चारों शब्द जो आये है वो सब के सब सैक्स (यौन) से जुड़े हैं। इससे हमें यह अंदाजा लगता है कि परमेश्वर यौन पापों को कितना गंभीरता से लेता है। चारों शब्दों को गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि चारों यौन पाप है मगर चारों में थोड़ी थोड़ी विभिन्नता या अंतर है। व्यभिचार और हवस एक दूसरे से जुड़े है क्योंकि हवस के बिना व्यभिचार नहीं होता मगर हो सकता है कि हवस हो लेकिन व्यक्ति व्यभिचार न कर पाए। कई लोग शर्म, डर या किसी मजबूरी के कारण व्यभिचार नहीं कर पाते लेकिन भीतर ही भीतर हवस (कामाग्नि) से जलते रहते हैं। कुछ भी हो लेकिन यह बात स्पष्ट है कि शरीर के इन घटिया कामों से परमेश्वर घृणा करता है। दूसरी तरफ हमें यह सीखना है कि परमेश्वर, पति पत्नी के रिश्ते एवं यौन संबंधों को आशीर्वाद देता है। पवित्र बाइबल की पुस्तक “उत्पति” में यह वर्णन है कि परमेश्वर ने प्रथम मनुष्यों की जोड़ी के यौन संबंधों और संतानोत्पत्ति पर आशीष दी। पाप एवम दुष्ट चालाक शैतान उस आनंददायी सैक्स के मामले में खेलकर या मानव लुभाकर मानव के यौन संबंधों को भ्रष्ट कर डाला। यह प्रक्रिया अनवरत जारी है।

Published by

Hasti

A student and teacher of religions and philosophies. A follower of Lord Jesus Christ

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